सृष्टि के रूप
अभी अभी जो दिखा दृश्य
वह क्या था
पत्तों का आपसी खेल
या हरे रंग के बदलते रूप
कितना हाथ हवा का था इसमें
इसे यूं होने देने में
वह चमक जो उभरी थी पत्तों पर
कहां से उतरी थी
हृदय के किस कौंध से होकर आई थी
पत्ते पर झलकी किसी स्मृति सी
जो आती है कभी-कभी होठों पर
पल भर के लिए बस
आख़िर किस स्रोत से आती है रौशनी
हम पर उतरने
एक स्त्री ने जब इस पर गौर किया
उसे लगा श्रृष्टि के कई रूप हैं
अपने हर रूप में वह पूर्ण है
उसके होने के कई स्रोत हैं जो उसी के हैं, उसे ही मालूम
यह जान वह स्त्री भर गई एक ही साथ भर गई हर्ष और दुख से
जो दिख रहा था उसे उसमे
बहुत पीड़ा थी
जो छिपा था उसमे जिज्ञासा उल्लास से भरी
जैसे आज की सुबह
अभी -अभी की सुबह
जिसमे एक बयार है
यानी सृष्टि आज ऐसी है
अपने अनेक रूपों में एक साथ
क्यों, एक कोयल भी तो कूक रही है अभी
एक गिलहरी अपने दो बच्चों के साथ हरे नीम के पौधे पर चढ़ रही है
इन सारी चीजों पर कहीं से एक रौशनी पड़ रही है
देखने में कोई रहस्य नहीं जान पड़ता था अभी
मगर रौशनी तो एक रहस्य है
जिस तरह वह चीज़ों को दिखा रही है
जैसे चीज़ों होती हैं आंखो और हृदय, दोनो को लिए।
2. बारिश और गिरते पत्ते
पहाड़ पर बारिश हो रही है
जिसे हम नहीं देख रहे
घने जंगल के मध्य शाल के पत्ते गिर रहे
हम उन्हे भी नहीं देख रहे
रेगिस्तान में चलते अंधड़ को भी
आसमान देख रहा है
या फिर रेत खुद इस पल
हम उस नियम को भी नहीं देख रहे जिसके तहत पत्ते गिरते हैं
आंधियां चलती हैं
हृदय में पीड़ा के भी रसायन को कौन जानता है
देखता भी कौन है
और कौन इस बात को कि इस पृथ्वी की तरह कई और ग्रह हैं जो पृथ्वीनुमा हैं, कई पृथ्वी
जिस पर हमसे अलग जीव रहते हैं
जिनके भी हृदय होते हैं
और उसमे पीड़ा
वहां जाने के भी नियम होंगे ही
शरीर छोड़कर ही वहां भी जाया जाता होगा
यह जानना भी कितना सुकूनदेह है कि बिना रहस्य के कुछ भी नहीं है इस कायनात में
कि जो अलख्य है वह भी नियमबध है
3. हवाएं
कितनी तरह की हवाएं होती हैं
जो हमसे होकर गुजरती हैं
आख़िर आज मैने जाना
कुछ मन को गीला करती है
कुछ उसे सुखा देती हैं
वे हवाएं जो पठारो से होकर आती हैं
वे जो जंगलों में रुकी रहती हैं
उनके बारे में जाना
आख़िर मैने विश्वास किया उस स्त्री का
बचपन में बताया था
कुछ ही हवाएं जानी जा सकती हैं
बाक़ी सब अनजान रहती हैं
जब कोई ऐसी हवा आकर लगे तुमसे
बाहें खोल देना
वह तुम्हारी पिछले किसी जन्म की प्रेमिका हो सकती है
उससे बातें करना
प्रेम के बारे में अब भी वह तुम्हें
कुछ बता सकती है
4.
बारिश की आवाज़
एक स्याह रात थी वह
स्याह से थोड़ी अलग
सभी जागे थे
देखना चाहते थे इसका रंग बदलना
अभी भी यह एक बैंगनी रात थी
थोड़ी देर बाद हल्की नीली रह जायेगी
जब यह सफेद होगी शायद तब कुछ लोग सोने जाएं
लेकिन तब तक तेज बारिश शुरु हो जाएगी
कुछ लोग बारिश की आवाज़ सुनने के लिए
फिर भी जागे रहेंगे
5. आज का दुख
आज के दिन
हमारे पास क्या कहने को कुछ ऐसा है
जिसे सुन गिलहरियां प्रसन्न हो जाएं
वे इंतज़ार में खा न जाएं तुलसी के सारे मोजर
कूद -फांद करती हुई नष्ट न करें उद्यान
आज के दिन हमारे पास
क्या हैं
उल्लसित होते भ्रम
कि धरती कभी नष्ट न होगी
प्रेम बचा रहेगा उसके हृदय में अपने असंख्य जीवों के लिए
आज के दिन कौन सा दुख है
जो साठ ग्रीष्म बाद भी टीसता है
किस सदी में हैं हम
जहां से नदियां जा चुकी हैं
गिलहरियां जब तुलसी के मोजर में रुचि नहीं दिखाती
6. स्त्री के प्रेम का रहस्य
वह कहता है
वह कुछ नहीं जानता
उसे किसी पक्षी ने आकर बताया है
“नदी के पास जाओ
पानी में पांव डूबावो
प्रेम करो किसी स्त्री से
उसका रहस्य जानो
तुम जानना चाहते हो यदि कायनात को
उसके ताप को”
कोई है जो कहता है
सबकुछ रहस्यमय है
पहाड़, पत्थर पेड़ चिड़या
कविता की कोई एक पंक्ति
अंधकार में डूबा यह शहर
ऊपर तारों का जाल
सब में रहस्य है एक उसी का
स्त्री के प्रेम का।
