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विचारधारा, एकअपर्याप्त टिप्पणी – विश्वनाथ त्रिपाठी

हाल ही में कुछ वर्षों से विचारधारा की बात कम की जा रही है। आन्दोलनों को विचारधारा से आवश्यक तौर पर जोड़ा जाता था। मुझे लगता है कि अब विचारधारा में चिन्तन से ज़्यादा जोड़ा जाता है, आन्दोलन से कम। इसका कारण यह कि अब सामाजिक दृश्य पर आन्दोलन कम होते हैं, चिन्तन ज़्यादा होता है। उदाहरण के लिए भारत में ही देखिए तो दलित चिन्तन, स्त्री-चिन्तन तो खूब होता है यानी लिखा-पढ़ा बोला जाता है, किन्तु आन्दोलन कम। अब जुलूस समारोह पहले जैसा बहुत कम होते हैं, पत्रिकाओं में लेख, परिचर्चा आदि जरूर खूब होते हैं।

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जन आंदोलन में बॉब डिलन के गीतों की भूमिका – भवी सिंह

Bob Dylan हमारे समय के शीर्ष गायक, संगीतकार और विद्रोही कवि के रूप में सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, विश्व भर में समादृत हैं । उन्होंने गीतों के अतिरिक्त दो पुस्तकें गीत साहित्य के दर्शन पर भी लिखी हैं।  केवल गीतकार या गायक होना ही उनकी विश्वव्यापी प्रसिद्धि का कारण नहीं है । अपने समय की देह और आत्मा को अपनी विद्रोही रचनाओं की शक्ति से इस तरह उद्वेलित करने वाले कवि - गायक किसी भी समाज में बहुत कम होते हैं। अमेरिका का अश्वेत आंदोलन जहां मार्टिन लूथर किंग जैसे नेताओं से प्रेरित- संचालित था, वहां अन्याय के खिलाफ बॉब डिलन के गीत जनसमुदाय के मन मस्तिष्क को विचलित कर रहे थे। ऐसा वातावरण था कि कुछ भी हो सकता है।  सम्भवनाओं का ऐसा विस्तृत आसमान बॉब डिलन के विद्रोही गीतों ने पैदा किया कि  भीतरी बाहरी सब कुछ थिरक उठा।    
                                                                                                  -संपादक

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