औपनिवेशिक आधुनिकता और हिंदी साहित्य – राजकुमार
यदि मान लें कि आधुनिक युग की शुरुआत उन्नीसवीं सदी में हुई तो फिर यह भी स्वीकार करना होगा कि आधुनिक हिन्दी के निर्माता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं। उन्नीसवीं सदी से पहले हिन्दी साहित्य शिष्ट और लोकसाहित्य से संवाद करते हुए विकसित होता रहा। किन्तु उन्नीसवीं सदी में औपनिवेशिक शासन के दौरान शिष्ट और लोक के अतिरिक्त एक अन्य तत्त्व भी जुड़ गया। इसका सम्बन्ध पश्चिमी आधुनिकता से है। उन्नीसवीं सदी में अँग्रेज़ी शिक्षा की शुरुआत के साथ भारतीय प्रबुद्ध वर्ग पश्चिमी आधुनिकता से परिचित हो गया। पश्चिमी ज्ञान और साहित्य का उस पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
