तकनीकी तीव्रता और दैनिक जीवन की व्यर्थता – गगन सेठ
गर्मियों की छुट्टियों में पहाड़ पर सैलानियों की भीड़। झील के किनारे बैठे हर उम्र के लोग। गंगा किनारे की भीड़। गोवा में समुद्र किनारे रेत पर खेलते बच्चे और व्यस्क। लम्बे दिन के काम के बाद घर आकर सोफे पर पसरे लोग। सारा दिन स्कूल से पढ़ कर घर आये बच्चे। बच्चे को पार्क में घूमती मां - और भी ऐसे ही कई दृश्य जो हमारी ज़िंदगी को एक रौनक, रंग और संगीत से भरे रखते हैं। सब मोबाइल फ़ोन में कंप्यूटर और इंटरनेट के सैलाब में डूबते जा रहे हैं। किसी को फुर्सत नहीं। सभी हर वक्त, हर दृश्य में, मोबाइल पर कुछ लिखते, बात करते या फोटो /सेल्फी लेते दीख जायेंगे। मुद्दत बाद मिले मित्र या सगे लोग, सभी मोबाइल पर व्यस्त। सभी उस मशीन जैसे ही लगते हैं जिस में वे खोये रहते हैं।
