संसार मे प्रजातंत्र : अपेक्षायें और उपेक्षायें – विभूति नारायण राय
लोकतंत्र मनुष्य के सभ्य होते जाने की गाथा है। यह एक बेहद लम्बी और तवील यात्रा है जो भिन्न भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भो मे मानव प्रजाति ने मुख़्तलिफ़ तरीक़ों से तय की है। यह कहना ज़्यादा सही होगा कि इस यात्रा मे इतने उतार चढ़ाव आये हैं कि कई बार फ़ैसला करना मुश्किल हो जाता है कि हम आगे बढ़े हैं या पीछे? आदिम साम्यवाद और कबीलाई यथार्थ या यूटोपिया जैसे काल्पनिक आदर्शों से गुजरती मनुष्यता की यह यात्रा संस्थाबद्ध धर्म, व्यक्तिगत संपत्ति, परिवार और राज्य के निर्माण की साक्षी बनी।
